ASHUTOSH GUPTA

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ashutoshda


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जनता की आवाज़ और वक्त को समझें समझदार सांसद सदस्य

Posted On: 21 Aug, 2011  
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पद और योग्यता

Posted On: 21 Jan, 2011  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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आतंक के दशक में उभरा मजबूत भारत

Posted On: 27 Dec, 2010  
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आतंक के दशक में उभरा मजबूत भारत

Posted On: 27 Dec, 2010  
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फ़र्जी डिग्री क्या कोई उपाय है

Posted On: 16 Dec, 2010  
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समस्या से पार पाने में उर्जा का उपयोग करें

Posted On: 15 Dec, 2010  
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दैनिक जागरण को बहुत बहुत बंधाई

Posted On: 4 Dec, 2010  
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आमिर खान जी संसद में

Posted On: 2 Dec, 2010  
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टोपी उछालने का मतलब

Posted On: 21 Nov, 2010  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

निशा जी नमस्कार वाकई देश की जनता बंधाई की पात्र है की पूरे दशक आतंकियों की मार झेलने के बाद भी मजबूती से खड़ी है खेलों में अभूत पूर्व प्रगति की है जिसमें आम जनता के बीच से उठ कर आये खिलाडियों ने यह दर्शा दिया है की अगर उन्हें सुविधा मिली तो वो किसी से कम नहीं अभी बहुत से ऐसे खिलाडी है जिनको हमें ऊपर लाना है भ्रस्टाचार और मह्गायीं दो ऐसे मुद्दे है जो हमारे राजनेताओं की देन है जिससे जनता भिड़ने को तैयार है चिंता न करें गरीब और गरीब कहाँ रहा निशा जी आज आम आदमी के पास मोबाइल है सुख सुविधा है केवल महगाई को लेकर जरूर कुछ समस्याएँ आ रही है जिसके पीछे कुछ भ्रष्ट लोग है जिनसे जल्द ही सुलट लिया जायेगा एका बनाये रखे ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् जय हिंद आशुतोष दा

के द्वारा:

मिश्रा जी नमस्कार कहते है की हमें आगे बढ़ते रहने के साथ साथ अपने पिछले क्रिया कलापों पर भी नजर डाल लेनी चहिये कहीं हम पुरानी गलतियों को दोहरा तो नहीं रहे है कही वो पुरानी गलतियाँ हमारी आने वाली प्रगति में रोड़ा तो नहीं बन रही बस इसका विश्लेषण कर रहा था लेख बनता चला गया !और आपके समक्ष पेश कर दिया कुछ आप सबकी प्रेरणा भी थी जो मुझे कुछ अच्छा लिखने के लिए प्रेरित कर रही थी वाकई पुरे दशक की मेहनत का यह सुखद परिणाम है की अच्छे अच्छे देश दशक के अंत मैं हमारे यहाँ पानी भरते नजर आये! भ्रस्ट्राचार का बोरिया बिस्तर नेता लोग जितनी जल्दी समेट ले तो अच्छा है वर्ना जनता इसके लिए भी तैयार है स्विस बैंको से पैसा वापस आएगा और सूद समेत चिंता न करें प्रतिक्रिया के आपका धन्यवाद कहना चाहूँगा आशुतोष दा

के द्वारा:

आशुतोष दा, पूरे दशक के आपके इस बेबाक़ विश्लेषण ने गदगद कर दिया । आपने हर पहलू को छुआ, और चहुं ओर दृष्टि फ़ेरी है । वाक़ई हमारा भारत अब नए विहान का स्पष्ट साक्षात्कार कर रहा है । नहीं दिख रही है तो मात्र हमारे तथाकथित नायकों की वह ईमानदार दृष्टि, जो इस अवसर का लाभ उठाकर एक नए और हर दृष्टि से सुरक्षित, सम्पन्न और विश्व को आर्थिक-सांस्कृतिक अगुआई की ओर अग्रसर होते जाने का मार्ग प्रशस्त कर सके । इनके लिये अभी भी भारत-माता-मंदिर का प्रांगण एक हराभरा चारागाह ही दिख रहा है, जिसकी नर्म घास को भौंडे तरीक़े से चर कर बर्बाद कर दो । ये भूल रहे हैं कि जनता अब इनकी पिट्ठू बनकर सबकुछ चुपचाप बर्दाश्त करने वाली जनता नहीं रह गई है, बल्कि अन्दर ही अन्दर नव-जागृति का लावा फ़ूट-फ़ूट कर बहने के लिये तैयार बैठा है । बस एक विस्फ़ोट और इनकी कागज़ की नाव का कोई अस्तित्व तक नहीं रहने वाला । इसी आने वाले दशक में जनता इनसे चौराहों पर ब्लिंकर चमकाती गाड़ियां रोककर हिसाब मांगेगी, और अपने तरीक़े से निबटेगी । बहरहाल हमें उस जनसैलाब का हिस्सा बनने की तैयारी में जुट जाना है, क्योंकि इन्होंने इतना माल छुपाकर रखा हुआ है कि उस माया का मोह इन्हें सुधरने तो नहीं देगा । इन्हें सुधारने, और नहीं सुधरने पर परिणाम भुगतने के लिये तैयार रहने की चेतावनी देता नृसिंहावतार हो चुका है, जिसकी गर्जना अब गली-गली में सुनाई दे रही है । स्वाभिमानी भारत की जय!

के द्वारा:

भाई साहेब आदाब आपके उत्तर में एक छोटी सी कहानी लिख रहा हूँ एक बार एक मनुष्य भगवान के पास पहुंचे उन्होंने कहा हे भगवान मुझे एक तितली और एक फूल चाहिए भगवान ने उसे एक cactus और एक caterpillar दिया वो बड़ा उदास हो गया उसने सोचा की भगवान ने कही भूल कर दी वो गुस्से में उसकों वही फेंक कर चला आया भगवान ने उसे उठा कर उसके पडोसी को दे दिया अगले दिन उसने देखा की उसके पडोसी के यहाँ उसी cactus पर फूल खिला है और caterpillar तितली बन उस पर मंडरा रहा है ! कभी कभी हम सोचते कुछ और है मिलता कुछ और जो की हमें लगता है लेकिन जब उसका परिणाम हमारे सामने आता है तो हम पाते है अरे इश्वर से हमने यही तो माँगा था शायद! क्रोध हमारे पतन का सबसे बड़ा कारन होता है ! आपकी समझ आ गया होगा ! आपका शुभचिंतक आशुतोष दा आदतन आपने मेरा ब्लाग पूरा पढ़ा नहीं है अपने ब्लाग के अंत में मैंने हेराफेरी के इस गोरखधंदे का उपाए लिखा है कृपया एक सकारात्मक टिपण्णी से रौशनी डालने का कष्ट करें आशुतोष दा

के द्वारा:

आशु जी,विस्तृत प्रक्रिया न देने का कारण ये था कि इस विषय की प्रारम्भिक जानकारी मुझको थी अतः स्टडी करके ही उत्तर देना चाहिए वो भी जब कि विषय हमारी युवा पीढी के भविष्य से सम्बद्ध हो.मेरी जानकारी के अनुसार आपने नम्बर वाली जो बात लिखी है वो शायद लागू भी की गयी थी.इसके लिए नासकोम में रजिस्ट्रेशन करना होता है वो नम्बर देते हैं आगे की प्रक्रिया इसी प्रकार से होती है परन्तु वो व्यवस्था चल नहीं पायी व्यवहारिक रूप में. जिन प्लेसमेंट सर्विसेस के पास जो रजिस्ट्रेशन कराया जाता है उनमे से ५०० से अधिक इस समय काली सूची में हैंउनके इन्ही कारनामों के कारण.डिग्री के अतिरिक्त अनुभव भी अपनी फर्जी कम्पनीज में jiदर्शा देती हैं जिसके बदले केंदिदेट्स से मोटी धनराशी बसूलती हैं.जितना मुझको ज्ञात है उसके अनुसार आवश्यकता इस बात की है कि अभ्यर्थी पहले ब्लेक लिस्टेड कम्प्नीस के विषय में पता करके यहाँ अपना पंजीकरण कराएं एवं फर्जी डिग्री व अनुभव के लालच से बचें अन्यथा अभ्यर्थी भी काली सूची में आ जाते हैंऔर उनका भविष्य अन्धकार मय हो जाता है.

के द्वारा: nishamittal nishamittal

आशुतोष दा, बड़ा अच्छा विषय चुना आपने । निश्चय ही यह देशव्यापी समस्या है, और इसके रूप भी अनेक हैं । नीचे से ऊपर तक सभी विभाग, यहां तक कि निज़ी कम्पनियों में भी व्याप्त भ्रष्टाचार इस बुराई को पोषण देता है । हमारे यहां मेधा के स्तर पर जो भी कमज़ोरियां दिखाई देती हैं, वह इसी समस्या की देन हैं, और कोढ़ में खाज की तरह आरक्षण के कारण भी अयोग्य बहालियों की खासी भरमार है । शिक्षण संस्थानों से लेकर सरकारी नौकरियों तक में इफ़रात की वैकेन्सिज खाली पड़ी रहती हैं, लेकिन आरक्षण कोटा के अभ्यर्थी न मिलने के कारण इन्हें भरा तक नहीं जाता, जबकि अन्य कास्ट के योग्य लड़के नौकरियां न मिलने से आत्महत्या को प्रेरित होते हैं । राजनीति ने आरक्षण के मुद्दे को अस्पृश्य बना कर रख दिया है । इसका सीधा असर विकास की गति पर पड़ता है । आपने फ़र्ज़ी डिग्रियों की बात की है, मैं आपको बताऊं कि राज्यों के पब्लिक सर्विस कमीशन तक इस धंधे में लिप्त हैं । मेरे अपने राज्य में राज्य पब्लिक सर्विस कमीशन के अध्यक्ष सहित निचले स्तर तक के कर्मचारी अपने खास लोगों एवं मोटी रकम की उगाही कर अन्य लोगों को फ़र्ज़ी परीक्षाओं तथा साक्षात्कार की भ्रष्ट खानापूर्ति कर नौकरियां बाँटने के दोषी पाए गए हैं, तथा उनपर मामले भी चल रहे हैं । डीएसपी स्तर तक के पुलिस अधिकारी ऐसी बहालियां पाकर वर्षों से नौकरी कर रहे थे, जिन्हें डिसमिस कर उनपर मामले चलाए जा रहे हैं । वैसे तो इसका एकमात्र उपाय भ्रष्टाचार पर किसी प्रकार अंकुश लगना ही है, परन्तु आपने जो उपाय सुझाया है, वह भी क़ाबिलेगौर है । आपको पता ही होगा कि देश के प्रत्येक नागरिक को सरकार की ओर से एक 'यूनिक आइडेन्टिफ़िकेशन नम्बर' दिया जाना प्रस्तावित है, जिसके लिये एक यूनिक फ़ोटो कार्ड भी सबको दिया जाना है । मेरे राज्य में प्रायोगिक तौर पर यह कार्य प्रगति पर भी है । इस आइडेन्टिफ़िकेशन को ज़ारी करने के बाद वोटर आइडी एवं अन्य पहचान पत्रों की आवश्यकता नहीं रह जाएगी । इसी पहचानपत्र में आपके प्रस्ताव के अनुसार यदि व्यक्ति के समस्त डीटेल्स को समाहित कर दिया जाय, तो फ़र्ज़ी डिग्रियों के कारण हो रहे नुकसान से बचा जा सकता है । साधुवाद ।

के द्वारा:

आदित्य जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् तभी तो हम तरक्की कम करते है कुंठा ग्रस्त ज्यादा रहते है कोई भी गलत काम होने पर अगर उसकी जरा सी जिम्मेदारी लेले तो समस्या को खत्म करने की पूरी तरह से न सही आंशिक पहल तो होगी जैसे मायावती जी अगर यह कह देती की हमारे से कही चूक हुई है और आगे से ऐसी घटना की पुनरावत्ति न होने देने के लिए हम प्रतिबद्ध है तो क्या गलती उनकी होती नहीं जनता को लगता की हमारी मुख्यमंती अपनी जिम्मेदारी समझती है और हमारी सुरक्षा को लेकर चिंतित है ये इस तरह की प्रतिक्रियाएं है जो जनता पर घटना होने के बाद बहुत असर करती है जैसे कोई भी आतंकी घटना होने के बाद हम सीधे तोर पर पकिस्तान पर आरोप लगा देते है सीधे तोर पर पकिस्तान को दोष देकर हम अपनी कमजोरियों को जाहिर करते की एक छोटा से देश से भी हम अपनी सुरक्षा नहीं कर सकते कोई हमसे पूछे हमारी सुरक्षा तंत्र को कैसे भेदा गया इसको लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता हम अपने सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बनायेगे ये कोई नहीं कहता अगर इस तरह के बयान हमारी जनता के बीच आये तो जनता को एक सकारत्मक सन्देश जाता है हर समय पकिस्तान को दोष देने की बजाय हम अपनी उर्जा अपनी सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में लगाये तो ज्यादा अच्छा होगा आशुतोष दा

के द्वारा:

मंगरू जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् असल में नेताओं का ये धन्दा नहीं मानसिक कुंठा है जो कुछ गलत होने वो एक दूसरे पर टाल कर निकालते है मान लीजिये की मायावती जी ये कह देती की हाँ हमारी गलती है या हमसे से चूक हुई हम आगे से और सख्ती से काम लेंगे तो इससे क्या ये साबित हो जाता की इन सबके पीछे उनकी नाकामी है नहीं इससे जनता के बीच एक सार्थक सन्देश जाता की हमारी मुख्यमंत्री ने हमारी रक्षा के लिए कितनी द्रढ़ सकल्प है और रही बात पी चिदम्बरम जी के इल्जाम लगाने की हमने राज्य सरकार को सतर्क रहने के लिए कह दिया था उन्होंने लापरवाही बरती इससे क्या उनकी जिम्मेदारी ख़तम हो जाती नहीं उन्हें भी ये कहना था की हमसे चूक हुई है चाहे वो राज्य स्तर पर हुई हो ये केंद्र स्तर पर आगे से हम और भी सतर्क रहंगे इन सब बातों से हालाँकि हादसे में जो नुक्सान हुआ है उसको पूरा तो नहीं किया जा सकता इतना जरूर होता की जनता का विश्वास उन पर और बढ़ जाता जनता को ये लगता की हमारे नेता हमारी सुरक्षा को लेकर चिंतित है अब गलतिया तो हर इंसान से होती है ये सकारात्मक और नकारात्मक सोचे है जिसकों जनता जानती और समझती है आशुतोष दा

के द्वारा:




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